
वाईन कैपिटल आफ इंडिया....यानी महाराष्ट्र के नासिक जिले में नासिक केपास गुलमोहर की अत्यंत दुर्लभ मानी जानी वाली प्रजाति का पेड़ देखा गया है। पर्यावरणवादियों और प्रकृतिप्रेमियों के लिए खुश खबर है। बड़ी बात तो यह है कि पेड़ पूरे शबाब पर है।
गुलमोहर की यह किस्म है कोलवेलिस ग्लोरी (कोलविलिया रेसेमोसा)।
ठाणो स्थित एक गैर सरकारी संगठन ‘हरियाली’ के अध्यक्ष और जाने-माने पर्यावरणवादी पूनम सिंघवी ने हाल ही में ओजर-पिंपलगांव क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 के पास इस प्रजाति के दो पेड़ देखे। सिंघवी ने बताया, ‘इस सुंदर पेड़ को मराठी में ‘किलबिल’ कहते हैं। मूलत: यह मेडागास्कर का है और लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। 9 अक्टूबर को जब मैंने उन्हें देखा तो दोनों पेड़ पूरे शबाब पर थे।’
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इन पेड़ों का भविष्य अच्छा नहीं है, क्योंकि आगे जाकर राजमार्ग को चौड़ा करने का काम शुरू होना है। सिंघवी ने सुझाव दिया कि पेड़ में बीज बनने की प्रक्रिया जारी है और नवंबर अंत तक ये परिपक्व हो जाएंगे। इन्हें एकत्रित कर इनसे पौधे तैयार किए जाने चाहिए ताकि इस प्रजाति को बचाया जा सके। बताते हैं कि ऐसे दो पेड़ मुंबई के जीजामाता उद्यान और कोलकाता के बॉटनिकल गार्डन में हैं। पर्यावरणवादी सिंघवी के मुताबिक उन्होंने 60 साल के अपने कॅरियर में इस पेड़ को कही ओर नहीं देखा है।
यह वृक्ष एक आम गुलमोहर की तरह 30 से 50 फीट की ऊंचाई तक बढ़ता है। इसमें कोन के आकार के चटख रंग के नारंगी-केसरिया फूल लगते हैं। इस पेड़ का नाम मॉरिशस के पूर्व गवर्नर सर चाल्र्स कोलविले के नाम पर रखा गया था।
साभार भास्कर
फोटो गूगल

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